उन्होंने बताया कि यह नीति कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देती है, जिससे किसानों और मजदूरों का नुकसान होगा। यह नीति पंजाब की उपजाऊ जमीनों को शहरीकरण के नाम पर छीनने की कोशिश है, जो खेती और अनाज उत्पादन को प्रभावित करेगी।
रैली सुबह 7 बजे जंडियाला गुरु मंडी से शुरू हुई और न्वा कोट, निज्जरपुरा, राजेवाल, मन्नवाला, राजासांसी सहित कई गांवों से होकर गुजरी। किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा, "हमारी मांग है कि सरकार इस नीति को तुरंत वापस ले। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम आंदोलन को और तेज करेंगे।"
उन्होंने बताया कि 20 अगस्त को जालंधर के कुक्कड़ गांव में दाना मंडी में एक विशाल महापंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें हजारों किसान शामिल होंगे। इसके अलावा, 16 अगस्त को हरियाणा के दना मढ़ी और 25 अगस्त को दिल्ली में भी महापंचायतें होंगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं, तो सरकारी प्रतिनिधियों को गांवों में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा और कहा, "सभी किसान संगठन एकजुट हैं और अलग-अलग तरीकों से इस नीति का विरोध कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य सरकार और कॉरपोरेट साठगांठ को नाकाम करना है।"
वहीं, पंजाब सरकार का दावा है कि लैंड पूलिंग नीति के तहत जमीन स्वेच्छा से ली जाएगी, लेकिन किसानों का आरोप है कि उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस रैली के माध्यम से किसानों ने अपनी एकता का प्रदर्शन किया और सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपनी जमीन की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।