जयपुर/दिल्ली। राजस्थान पुलिस की सीआईडी इंटेलिजेंस यूनिट ने एक चौंकाने वाले खुलासे के बाद भारतीय नौसेना के कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। आरोपी विशाल यादव, जो दिल्ली स्थित नौसेना भवन में डायरेक्टोरेट ऑफ डॉकयार्ड में अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) के पद पर तैनात था, उस पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के लिए जासूसी करने का आरोप है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी संवेदनशील जानकारी 50 हजार रुपए में एक पाकिस्तानी महिला हैंडलर को दी थी। सोशल मीडिया से शुरू हुआ जासूसी का खेल सीआईडी इंटेलिजेंस सूत्रों के अनुसार, आरोपी विशाल यादव की फेसबुक पर एक महिला से दोस्ती हुई, जो खुद को प्रिया शर्मा बताकर पेश कर रही थी। बाद में पता चला कि वह एक पाकिस्तानी हैंडलर थी। फेसबुक चैट से शुरू हुई बातचीत वॉट्सऐप और फिर टेलीग्राम तक पहुंची। महीनों तक दोनों के बीच संवाद चलता रहा। बाद में महिला हैंडलर ने अपनी असली पहचान भी विशाल को बता दी, लेकिन तब तक वह पैसों के जाल में फंस चुका था। ‘अच्छी खबर के पैसे ज्यादा दूंगी’ पूछताछ में सामने आया है कि शुरुआत में विशाल को एक खबर के बदले 5 से 6 हजार रुपए मिलते थे। लेकिन महिला हैंडलर ने उसे अधिक रकम का लालच दिया। कहा— “अगर अच्छी खबर दोगे तो पैसे ज्यादा मिलेंगे।” इसी के बाद आरोपी ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी गोपनीय जानकारी भेजी, जिसके बदले उसे एक बार में 50 हजार रुपए मिले। अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी को कुल मिलाकर 1.5 से 2 लाख रुपए मिले, जिनमें कुछ रकम उसके बैंक खातों में जमा हुई, जबकि कुछ क्रिप्टोकरेंसी (USDT) के रूप में दी गई। ऑनलाइन गेमिंग की लत और सोशल मीडिया की जाल पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी विशाल यादव ऑनलाइन गेम खेलने का आदी था और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहता था। इन्हीं माध्यमों से वह पाकिस्तानी महिला हैंडलर के संपर्क में आया। सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर दुश्मन एजेंसियों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया। सीआईडी की सक्रियता से हुआ भंडाफोड़ सीआईडी इंटेलिजेंस यूनिट की नजर लंबे समय से ऐसे संदिग्धों पर थी, जो पाकिस्तानी एजेंसियों के संपर्क में हैं। आईजी सीआईडी (सुरक्षा) विष्णुकांत गुप्ता के अनुसार, जैसे ही यह पुष्टि हुई कि विशाल यादव देश की सामरिक जानकारी साझा कर रहा है, उसे तुरंत हिरासत में लिया गया और जयपुर लाया गया। यहां पर केंद्रीय एजेंसियों ने भी उससे गहन पूछताछ की। मोबाइल से मिले अहम सुराग आरोपी के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इनमें गोपनीय सूचनाएं भेजने के सबूत, पैसों के लेन-देन की जानकारी और चैट रिकॉर्ड शामिल हैं। सबसे खतरनाक बात यह रही कि आरोपी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी नौसेना और अन्य रक्षा गतिविधियों से जुड़ी जानकारी महिला हैंडलर को भेजी थी। आईजी बोले - पाक एजेंसियां कुछ भी कर सकती हैं आईजी विष्णुकांत गुप्ता ने कहा—“पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां सामरिक जानकारी हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। ऐसे में हम सोशल मीडिया और संदिग्ध नेटवर्क्स पर सतर्क नजर रखते हैं। यह गिरफ्तारी हमारी निरंतर निगरानी का ही परिणाम है।” फिलहाल आरोपी रिमांड पर, जांच जारी विशाल यादव को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। उससे पूछताछ का दायरा बढ़ाया जा रहा है। एजेंसियों को शक है कि वह केवल एक मोहरा है और इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के गुनाह का नहीं, बल्कि हमारी साइबर और सामरिक सुरक्षा पर लगातार हो रहे हमलों की चेतावनी है। सवाल ये है कि क्या सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में देश की रक्षा-रेखा सुरक्षित है?
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