साध्वी प्रज्ञा ने कहा, “मुझे मजबूर किया गया, लेकिन मैंने दबाव में आकर किसी का नाम नहीं लिया। मैंने किसी को झूठा नहीं फंसाया। सच बोलने और दबाव का विरोध करने के कारण मुझे अमानवीय यातनाएं दी गईं और तरह-तरह से प्रताड़ित किया गया।” उन्होंने इस दौरान अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए भावुक लहजे में कहा कि सच के रास्ते पर चलना बहुत कठिन था, लेकिन अंततः सत्य की जीत हुई।
NIA कोर्ट द्वारा साध्वी प्रज्ञा समेत सभी आरोपियों को बरी करने के फैसले के बाद वह पहली बार भोपाल स्थित अपने आवास लौटीं, जहां समर्थकों की भीड़ ने फूल मालाओं और नारों के साथ उनका स्वागत किया। समर्थकों ने अदालत के फैसले को न्याय की जीत बताया, वहीं साध्वी प्रज्ञा ने इसे अपने जीवन का एक अहम मोड़ कहा। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल उनका ही नहीं, बल्कि उन सभी निर्दोष लोगों की जीत है जो सालों तक बेगुनाही साबित करने के लिए संघर्ष करते रहे।