औलख ने बताया कि उनके पास कई किसानों की शिकायतें आई हैं कि उनकी फसल का पंजीकरण किसी और के नाम करवा दिया गया है। आरोप है कि यह सारा खेल राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहा है।
गोरीवाला तहसील में बड़ा फर्जीवाड़ा
गोरीवाला तहसील के गांव राजपुरा के किसान लीलाधर पुत्र माहला राम, सरोज पत्नी प्रेम कुमार, निर्मल पुत्र करतार सिंह, कालूराम पुत्र काशी राम और बालमुकुंद सहित कई किसानों ने जब अपनी फसल का पंजीकरण कराने की कोशिश की, तो वे हैरान रह गए। पोर्टल पर पहले से ही उनके खेत का पंजीकरण "साहिला पुत्र हसम" के नाम से दर्ज था, जिसमें मोबाइल नंबर 9671677645 भी जुड़ा हुआ था। किसानों ने इसकी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन थाना ओढ़ां के प्रभारी ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया और इसे अपने कार्यक्षेत्र से बाहर बता दिया।
रानियां तहसील में भी धोखाधड़ी का खुलासा
इसी तरह रानियां तहसील के गांव सादेवाला में भी बड़े स्तर पर फर्जी पंजीकरण का मामला सामने आया है। यहां किसान नरेंद्र सिंह पुत्र बलवीर सिंह, बजीर सिंह पुत्र सुंदर सिंह, हनुमान पुत्र पूर्ण सिंह, गिरदावरी देवी पत्नी बृजलाल सहित कई किसानों की फसल का पंजीकरण एक धोखेबाज "सकुनत" नामक व्यक्ति के नाम से दर्ज कर दिया गया, जिसके साथ मोबाइल नंबर 83978 82902 जुड़ा हुआ था।
हर साल दोहराई जाती है कहानी
औलख का कहना है कि ऐसे मामले हरियाणा के कई जिलों में हर साल सामने आते हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन स्थायी समाधान निकालने में नाकाम रहे हैं। पीड़ित किसान थानों और अधिकारियों के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिलता है।
सरकार से कड़ी मांग
औलख ने मांग की कि सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि किसानों की शिकायत पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए और धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही "मेरी फसल मेरा ब्योरा" पोर्टल की प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाया जाए, ताकि किसान खेत छोड़कर पोर्टल के चक्कर में न फंसें।
औलख ने कहा, "किसानों को पोर्टल के जाल से आज़ाद किया जाए। हरियाणा सरकार को पोर्टल-पोर्टल का खेल बंद करना चाहिए, वरना किसान आंदोलन का सहारा लेने को मजबूर होंगे।"
इस मौके पर बीकेई से गुरविंदर सिंह और अरविंदर सिंह भी मौजूद रहे।