ब्यूरो के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसका बेटा रिशिव अपने नाम से मेडिकल स्टोर खोलना चाहता था, जिसके लिए उसने 12 जुलाई को ऑनलाइन ड्रग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। काफी समय बीतने के बाद जब कोई कार्यवाही नहीं हुई तो शिकायतकर्ता 17 जुलाई को अमित कैफे, एनआईटी फरीदाबाद पहुंचा, जहां एक व्यक्ति कर्ण ने उसे बताया कि ऐसे आवेदन पास नहीं होते और कहा कि वह फाइल ड्रग ऑफिस तक पहुँचा देगा। साथ ही शिकायतकर्ता को हेल्पर आकाश से मिलने की सलाह दी।
बाद में शिकायतकर्ता की मुलाकात ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीन राठी से हुई, जिन्होंने दुकान का ऑनलाइन डाटा चेक करने के बाद कहा कि सर्वे टीम भेजी जाएगी। उसी दिन हेल्पर आकाश ने दुकान पर सर्वे किया और 15,500 रुपये ‘साहब’ के नाम और 500 रुपये खुद के लिए रिश्वत की मांग की।
शिकायत सही पाए जाने पर राज्य सतर्कता ब्यूरो की टीम ने योजना बनाकर आरोपी आकाश को खाद्य एवं औषधि प्रशासन कार्यालय, एनआईटी फरीदाबाद में ही 16,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके अतिरिक्त मौके से 39,000 रुपये की संदिग्ध नकदी भी बरामद की गई है।
ब्यूरो ने आरोपी के खिलाफ थाना राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, फरीदाबाद में अभियोग संख्या 21 दिनांक 22.07.2025 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है।
ब्यूरो के अनुसार, बरामद नकदी और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है।